योगासनों और प्राणायाम के बीच सम्बन्ध - Correlation between Yoga and Pranayam
योगासनों और प्राणायाम के बीच घनिष्ट सम्बन्ध है प्राणायाम करने के लिए साधक को सर्वप्रथम पद्मासन ,स्वस्तिकासन और सुखासन जैसे आसन सिद्ध करने चाहियेजब आप किसी भी आसन पर लगभग तीन घंटों तक शरीर को तनिक भी हिलाए बिना बैठ सकें तभी उस आसन पर सिद्धि या प्रभुत्व पा लिया है - ऐसा कहा जा सकता है / प्रारंभ में ऐसा करना बड़ा कठिन लगेगा ,इसलिए पहले स्वानुकूल आसन लेकर अनुलोम - विलोम प्राणायाम करें धीरे धीरे प्राणायाम के साथ - साथ आसन पर भी प्रभुत्व आ जाएगा /इस प्रकार आसनों पर प्राप्त प्रभुत्व प्राणायाम करने में अत्यन्त सहायक सिद्ध होगा /इसी प्रकार योगासनों के साथ योग्य मात्रा में पूरक ,रेचक और कुम्भक (ये तीन प्राणायाम के प्रकार हैं ) किए जाएँ तो योगासनों का प्रभाव अत्यन्त बढ़ जाता है / आसन करने में और उनकी स्तिथि का निर्वाह करने में भी प्राणायाम का ज्ञान सहायक बनता है योगासन और प्राणायाम के द्वारा फेफडों का योग्य ढंग से विस्तारण और संकुचन किया जा सकता हैफल्स्वरूप फेफडों को अधिक प्राणवायु प्राप्त होती है , शरीर निरोगी बनता है और मन प्रफुल्लित रहता है इसलिए योगासनों का अभ्यास करने वाले व्यक्ति को कम से कम प्राणायाम का सामान्य ज्ञान आवश्यक है
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