Sunday, January 12, 2014

यम , अष्टांग योग का पहला अंग ; YAM, the first one of the Eight-Fold Yoga

यम का अर्थ है 'निग्रह' अथवा अंकुश (कर्म-बन्ध  पर ) । कर्म बंधन के सभी रास्तों पर रोक लगा देना ही यम है । यम पांच हैं । अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य, एवं अपरिग्रह । 
मन, वचन, एवं कर्म से किसी प्राणी को दुःख या कष्ट न देना अहिंसा है 
हम स्वयं जो मानते व जानते  हैं , वोही तथ्य किसी अन्य के सामने उसी रूप  में प्रस्तुत किया जाये तो ये सत्य है  
जिस वस्तु पे अधिकार न हो उसे न अपनाना या किसी अन्य कि वस्तु  बिना उनकी आज्ञा के प्राप्त न करना अस्तेय है । साधारण शब्द में इसका अर्थ है चोरी न करना 
हमारे शरीर की  सभी इंद्रियों का संयम करना ब्रह्मचर्य है 
अवश्यकता से अधिक वस्तुओं का संग्रह न करना अपरिग्रह कहलाता  है । 

YAM means a fullstop to any possibility of starting a new karma-loop. It is a means to close all the possible ways of acquiring negative doings. There are five YAM.
Ahinsa, Satya, Asteya, Brahmcharya, Aparigrah.

(Translation to be cont. tommorow)

This is the first one of the eight posts over Eight-Fold Yoga discussion.

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